Lakshadweep History: लक्षद्वीप कैसे बना भारत का हिस्सा चौंका देगा इतिहास
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Lakshadweep History: लक्षद्वीप कैसे बना भारत का हिस्सा चौंका देगा इतिहास

पीएम मोदी ने हाल ही में लक्षद्वीप विजिट किया पीएम मोदी की लक्षद्वीप की यात्रा की काफी चर्चाएं हो रही है उनके एडवेंचर की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है यहां का एरिया केवल 32 वर्ग किलोमीटर है पीएम मोदी ने स्नर्कलिंग की अपनी तस्वीरें शेयर करते हुए भारतीयों से लक्षद्वीप घूमने जाने की अपील की उन्होंने कहा जो लोग एडवेंचर पसंद करते है।

 

Lakshadweep History: लक्षद्वीप कैसे बना भारत का हिस्सा चौंका देगा इतिहास

 

उनके लिस्ट में लक्षद्वीप टॉप पर होना चाहिए पीएम मोदी ने ऐसा क्यों कहा और लक्षद्वीप में ऐसा क्या है जिसकी खूबसूरती के कायल पीएम मोदी भी हो गए हैं तो चलिए जानते हैं लक्षद्वीप के बारे में कुछ खास बातें साथ ही यह भी जानते हैं कि लक्षद्वीप भारत का हिस्सा कैसे बना यह कहानी भी बड़ी दिलचस्प है भारत के दक्षिणी पश्चिम तट से लक्षद्वीप की दूरी 200 से 400 किमी है लक्षद्वीप पर कुल 36 छोटे-छोटे आइलैंड्स का ग्रुप है।

 

लेकिन यहां सिर्फ 10 टापुओं पर ही लोग रहते हैं यहां की 96 फ आबादी मुस्लिम है लक्षद्वीप की राजधानी की बात करें तो यहां की राजधानी कवर की है साल 2011 की जनगणना के अनुसार लक्षद्वीप की जनसंख्या कुल 64472 है यहां का लिटरेसी रेट 91.8 2 पर है जो भारत के कई बड़े-बड़े शहरों से ज्यादा है तो चलिए अब जानते हैं कि लक्षद्वीप आखिर भारत का हिस्सा कैसे बना बात अगस्त साल 1947 की है जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था।

 

भारत गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 500 से ज्यादा रियासतों को एक करने में अहम भूमिका निभाई थी पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने पंजाब सिंध बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने की भरपूर कोशिश की लेकिन किसी का भी ध्यान लक्षद्वीप पर नहीं गया आजादी के बाद लक्षद्वीप भारत और पाकिस्तान में से किसी के भी अधिकार क्षेत्र में नहीं था।

 

क्योंकि दोनों ही पहले मेन लैंड देशों को अपने साथ चोड़ने की कोशिश कर रहे थे अगस्त आखिरी में पाकिस्तान के लियाकत अली खान ने सोचा कि लक्षद्वीप मुस्लिम बहुल इलाका है और भारत ने अभी तक इस पर दावा भी नहीं किया है तो क्यों ना अपना अधिकार जमा लिया जाए इतिहासकार बताते हैं कि उसी वक्त भारत के गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल भी लक्षद्वीप के बारे में ही सोच रहे थे हालांकि दोनों देश थोड़ा कंफ्यूज थे कि वहां भी किसी ने दावा किया है।

या फिर नहीं इसी कंफ्यूजन के बीच पाकिस्तान ने अपना एक युद्ध पोथ लक्षद्वीप के लिए भेज दिया उधर सरदार पटेल ने आर कोट रामस्वामी मुदालियर और आर कोट लक्ष्मण स्वामी मुदालियर को सेना लेकर तुरंत लक्षद्वीप की ओर जाने के लिए कहा उधर पाकिस्तान की फौज भी रास्ते में ही थी आखिरकार भारत की सेना पहले लक्षद्वीप पहुंच गई और तिरंगा फहरा दिया गया कुछ ही समय बाद पाकिस्तान का युद्धपोत भी वहां पहुंच गया।

 

मगर भारत का तिरंगा झंडा देखकर दबे पांव वापस लौट गया तब से लक्षद्वीप भारत का भिन्न आ ग है लेकिन हमारी सेना को आधे घंटे की भी देरी हो जाती तो आज स्थिति कुछ और भी होती हो सकती थी भारत की सुरक्षा के लिहाज से लक्षद्वीप काफी अहम माना जाता है यूनाइटेड नेशंस लॉऑफ सी कन्वेंशंस के मुताबिक किसी भी देश का उसके समुद्री तट से 22 किमी तक का एरिया पर उसी देश के अधिकार क्षेत्र में होता है।

 

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इस कारण भारत को समुद्र में 20000 स्क्वायर किलोमीटर तक ज्यादा एक्सेस मिल जाता है यहां से हिंद महासागर और अरब सागर दोनों पर नजर रखी जा सकती है सेना और बिजनेस के हिसाब से भी बड़ा महत्व रखता है राजधानी कवर ती में भारतीय नौसेना का बेस आईएनएस द्वीप रक्षक बना हुआ है इसे 30 अप्रैल 2012 को कमीशन किया गया था चीन के लगातार बढ़ते दबदबे के बीच लक्षद्वीप आइलैंड पर भारत अपना मिलिट्री बेस तैयार कर रहा है।

 

इससे चीन और पाकिस्तान से आने वाले किसी भी बड़े खतरे को टाला जा सकता है साल 2008 में मुंबई हमले के बाद से ही यहां सैन्य ताकत बढ़ाने पर सोट दिया जाता रहा साल 2010 में पहले कोस्टगार्ड स्टेशन बनाया गया साल 2012 में नेवी बेस की स्थापना की गई।

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