Vinod Upadhyay का एनकाउंटर कैसे हुआ ये है यूपी के स्वभाव की कहानी
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Vinod Upadhyay का एनकाउंटर कैसे हुआ ये है यूपी के स्वभाव की कहानी

एक थप्पड़ से अपराध की शुरुआत फिर हत्या से मिली पहचान तो सिर पर इनाम रखा गया पूरे 1 लाख का फिर एनकाउंटर जिसे सुन दूसरे गैंगस्टर भी ख्वाब उठे आज आपको कहानी बताएंगे यूपी के उस गैंगस्टर की जिसने पुलिस से लेकर सरकार की नाक में दम कर रखा था एक दो नहीं 35 मुकदमे आखिर में एनकाउंटर हुआ हम बात कर रहे हैं यूपी के गैंगस्टर विनोद उपाध्याय की जिसके एनकाउंटर की खबर जैसे ही मिली सोशल मीडिया पर तहलका मच गया एनकाउंटर का जिक्र हो तो सबसे पहले जहन में नाम आता है।

 

Vinod Upadhyay का एनकाउंटर कैसे हुआ? ये है यूपी के स्वभाव की कहानी

 

पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में धड़ाधड़ एनकाउंटर की खबरें आई हैं रात के खुप अंधेरे में एक और नाम इस लिस्ट में जुड़ गया है विनोद उपाध्याय पूरी घटना को पहले मोटे शब्दों में समझें तो गैंगस्टर विनोद उपाध्याय को पकड़ने के लिए यूपी एसटीएफ ऑपरेशन चला रही थी देर रात कहे या तड़के सुबह घड़ी में समय था 3:30 और तारीख 5 जनवरी लग चुकी थी सुल्तानपुर जिले में एसटीएफ और विनोद उपाध्याय का आमना-सामना होता है।

 

एसटीएफ विनोद की तरफ बढ़ती एसटीएफ के मुताबिक विनोद गोली चला देता है और एसटीएफ जवाब में फायर करती है जिसमें गैंगस्टर विनोद को गोली लग जाती है गंभीर हालत में विनोद को अस्पताल ले जाया जाता है लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो जाती है इसकी पुष्टि की है यूपी एसटीएफ के डे टी एसपी दीपक सिंह ने अब यह भी जान लीजिए कि यूपी एसटीएफ के हिट लिस्ट में मौजूद यह खार गैंगस्टर विनोद उपाध्याय था।

 

Vinod Upadhyay का एनकाउंटर कैसे हुआ ये है यूपी के स्वभाव की कहानी

 

कौन और क्या है अपराध की दुनिया में विनोद की एंट्री की कहानी विनोद अयोध्या जिले के पूर्वा का रहने वाला था उसकी कहानी शुरू होती है सिर्फ एक थप्पड़ से सुनने में थोड़ा फिल्मी लगेगा लेकिन इसी थप्पड़ से हुई थी गैंगस्टर विनोद उपाध्याय की शुरुआत थोड़ा फ्लैशबैक में जाएं तो साल 2004 में गोरखपुर जेल में बंद दूसरे अपराधी जीत नारायण मिश्र की विनोद से बहस हुई बात बढ़ जाती है।

 

और जीत नारायण मिश्र विनोद को एक थप्पड़ झड़ देता है कहते हैं ना कि थप्पड़ पड़ा गाल पर लेकिन चोट लगी सीधा दिल पर कुछ इसी तरह विनोद उपाध्याय को भी य थप्पड़ चुप जाता है 1 साल बाद यानी साल 2005 में जीत नारायण मिश्र जेल से बाहर आता है घात लगाए बैठे विनोद को मौका मिल जाता है संत कबीर नगर बखीरा के पास विनोद जीत नारायण की हत्या कर दे है और यहीं से होती है।

 

गैंगस्टर विनोद उपाध्याय की बिगन उसके नेम और फेम की चर्चा होने लगी थी कहते हैं ना एक बार अगर क्राइम में एंट्री हो गई फिर उससे बाहर निकलना लगभग नामुमकिन सा हो जाता है और हैप्पी एंडिंग की गुंजाइश तो छोड़ी दीजिए अपराध की कहानी आगे बढ़ी और विनोद ने अपना एक गिरोह बनाया यह गिरोह गोरखपुर बस्ती संत कबीर नगर और लखनऊ जैसे शहरों में सक्रिय था।

 

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अब अपहरण फिरौती और हत्या जैसे अपराध विनोद उपाध्याय के लिए बिल्कुल आम हो गए थे विनोद की लिस्ट बढ़ती जा रही थी 2007 में बीएसपी ने विनोद को विधानसभा चुनाव का टिकट भी दे दिया था खैर अपराधियों के चुनाव लड़ने के सैकड़ों उदाहरण हम पहले भी देख चुके हैं चुनाव में विनोद उपाध्याय का सिक्का नहीं चला वो चुनाव हार गया था पिछले साल 17 जून 2023 को योगी सरकार ने विनोद के ठिकानों पर बुलडोजर का जोर दिखाया।

जिसमें गैंगस्टर विनोद के घर को भी गिरा दिया गया उस वक्त विनोद पर 50 हज का इनाम था विनोद उपाध्याय पर 35 मुकदमे दर्ज थे गोरखपुर पुलिस ने 50000 से बढ़ाकर इनाम को 1 लाख कर दिया सात महीनों से यूपी एसटीएफ उसकी तलाश में थी 5 जनवरी तड़के सुबह एसटीएफ की तलाश पूरी हुई और इसी एनकाउंटर से खत्म हुई।

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